मूर्ख-मंडली

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गंगा पुस्तकमाला कार्यालय, 1962 - Počet stran: 114
Hindi translation of Dvijendralal Ray's Tryahaparśa.

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अगर अच्छा अजी अब अभी अरे आदमी आप इस इसी एक ऐसी और औरत कर करते करना करने कह कहाँ का प्रवेश कि किया किशोर किशोरसिंह की कुंजविहारी कुछ के के साथ कैसे को कोई कौन क्या क्या है क्यों क्यों जी खूब गंगाधर गई गए गोपाल गोपालसिंह चमेली चाहे ज़रूर जा जाता जी जैसे जो ठीक तक तब तरह तुम तुम्हारा तो तो क्या था दिन देख देखकर देखो दो नहीं है ने नौकर पड़ता है पर प्रस्थान फिर बड़ा बनवारी बहुत बात बाप ब्याह भगवती भगवतीप्रसाद भगवानदास भी भैया मगर मथुरा मर मुझे मुसाहब में मेरा मेरे मैं मैंने मोती मोहनलाल यह यहाँ यही या रहा है रही रहे राजा राजा साहब राधेलाल रानी रुपए लड़का लड़की लेकिन लो लोग वह वही श्यामलाल सकता है सब समझ से सो हम हाँ हाथ ही नहीं हुआ हूँ हे हे है कि हैं हो हो गया होगा होता

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