Hindī-kāvya meṃ niyativāda

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Kitāba Mahala, 1964 - Počet stran: 384

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अतः अनेक अपनी अपने अब अभिव्यक्ति आदि इस इस प्रकार ई० ईश्वर उनका उनकी उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसमें उसे एक एवं ओर कर करके करता है करती करते करने कर्म कर्मों कवि कहते हैं का काल काव्य में किन्तु किया है किसी कुछ के कारण के रूप में के लिए के साथ को कोई गई गए गया है छंद जब जा जाता है जाती जीव के जीवन जो तक तथा तब तो था थी थे दिया दुख देता दो० नहीं नियति नियति के नियतिवाद की ने पर पृष्ठ प्रभाव प्राप्त फल भवितव्यता भाग भाग्य भारतीय भी मनुष्य में नियतिवाद मैं यह या रहा राजा राम वह वही वाले वि० विधाता विधि विभिन्न विश्वास वे शक्ति सकता सब समय समस्त साहित्य से सो स्थान हम ही हुआ हुई हुए है और है कि है तथा हो होकर होता है होती होते होने

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